• {:en}Ayurveda for Blockage in Heart{:}{:hi}हार्ट ब्लॉकेज का आयुर्वेदिक इलाज {:}

    हार्ट ब्लॉकेज का आयुर्वेदिक इलाज।  जब भी यह बात चलती है तो दिमाग में आता है – अर्जुन की छाल, लहसुन की कली या ऐसा ही कोई नुस्खा और सब इसे आजमा के भी देखना चाहते हैं।  क्यों ना हो? जहां एलोपैथी में स्टंट्स और सर्जरी हल हो तो हर कोई चाहता है की इस समस्या का कोई स्थाई समाधान निकले। लेकिन ना तो अर्जुन की छाल पीने से किसी के हार्ट की  समस्या का समाधान हुआ और ना ही लहसुन को खाली पेट लेने से।  तो क्या, आयुर्वेद में हार्ट की ब्लॉकेज का कोई हल नहीं है? क्या वास्तव में हरेक रोगी को इस बीमारी के साथ रहना पड़ेगा। क्या स्टंट्स लगवाना और बाईपास के लिए मानस बनाना यही दो उपाय हैं इस समस्या के लिए? क्या आयुर्वेद इस विषय में निरर्थक है?

    हार्ट की ब्लॉकेज आजकल बहुत कॉमन होती जा रही है।  10 में से एक आदमी को अब यह बिमारी होने लगी है।  पहले सोचा जाता था की यह बीमारी सिर्फ शहर के लोगों को होती है लेकिन धीरे धीरे आज कल यह गांवों में भी उतनी ही सामान्य हो चुकी है।  हार्ट की ब्लॉकेज के बारे में जब भी बात चलती है तो एक मात्र डर होता है की कहीं कोई बहुत बड़ी समस्या ना हो जाए। यह डर लाज़मी भी है। एक बार धड़कन बंद अगर हो जाए तो किसी के पास कोई भी हल नहीं होता है।

    आयुर्वेद क्या कहता है हार्ट ब्लॉकेज के बारे में ?

    सीधे सीधे आयुर्वेद में हार्ट की ब्लॉकेज का कोई वर्णन नहीं मिलता है। हृद रोग के नाम से कई किताबों में पुरे अध्याय तो हैं लेकिन इनमें जो वर्णन है वो बहुत सी व्याधियों के बारे में है।  ना की सीधे सीधे हार्ट की किसी व्याधि के बारे में।  जब तक हम यह नहीं समझ सकते की आयुर्वेद में हार्ट से सम्बंधित बीमारियां किस केटेगरी में आती हैं।  तब तक इन बिमारियों के हल के बारे में कुछ भी कहना गलत है। सुखायु आयुर्वेद हृदय संसथान में हम लोग बिमारियों को शास्त्रीय विधि से ठीक करने में विश्वास रखते हैं।  ना की किसी नुस्खे  अस्थायी तरीके में।

    आयुर्वेद में चिकित्सा का सबसे बड़ा सिद्धांत है – सम्प्राप्ति विघटन।  मतलब – व्याधि कैसे और किस तरीके से हुई उसको उलटा करना।  मान लीजिये की हमें पता है की हार्ट में ब्लॉकेज कैसे हुई है।  तो किस प्रकार यह व्याधि हुई है उसे हम सम्प्राप्ति कहते हैं।  और उस सम्प्राप्ति को उलटा करना या तोड़ना ही सम्प्राप्त विघटन है।

    अतः सभी व्यक्तियों में यह सम्प्राप्ति एक जैसी ही हो।  जरुरी तो नहीं।  जब पता चल जाए की किस कारण व्याधि हुई है तो उसकी चिकित्सा करने से हम व्याधि से मुक्ति पा सकते हैं।  यह हार्ट की ब्लॉकेज ही नहीं सभी बिमारियों पर लागू होता है।

    हार्ट की बीमारियां क्यों होती हैं ?

    हार्ट की बिमारियों  साधारणतया एक ही कारण बताया जाता है।  वो है – कोलेस्ट्रॉल का शरीर में बढ़ जाना।  लेकिन यह  पूर्ण सत्य नहीं है।  कोलेस्ट्रॉल जमा जरूर होता है , लेकिन कारण नहीं है।  यह ऐसा है की अगर सड़क में  या कहीं गड्ढा हो जाए तो वहाँ कचरा जमा होने लगता है।  और सड़क में ऊंचा एक उभार बना देता है।  कारण गड्ढा है।  ना की कचरा।

    दूसरी और ये जो गड्ढे रक्त वाहिनियों में बन जाते हैं , ये बनते हैं तनाव के कारण।  जब हृदय को अधिक मात्रा में लोड लेना पड़ता है तो।  रुधिर वाहिनियों पर जोर पड़ता है और उनकी अंदर की सतह उखड़ने लगती हैं।  तुरंत लीकेज रोकने के लिए ढेरों रक्त में बहने वाली कोशिकाएं वहाँ आ कर जमना शुरू कर देती हैं।  और कोलेस्ट्रॉल उन रक्त कणिकाओं के साथ आकर जमना शुरू हो जाता है।  अगर यह प्रक्रिया ना हो तो ये रक्तवाहिनियां रोजाना लीक होने लगेंगी।

    अतः जो प्रक्रिया जीवन बचाने के लिए कुदरत ने हमें दी है वही हमारे विरुद्ध चली जाती है। लेकिन कोलेस्ट्रॉल इसमें कहीं से कहीं तक जिम्मेवार नहीं होता है।  जिम्मेवार है जीवनशैली।  जिम्मेवार है हमारा रहन सहन।  जिस पर किसी  ध्यान नहीं है।  एलोपैथी सर्जरी के लिए उतावले हैं। और आयुर्वेद में या तो नुस्खे बता दिए जाते हैं या फिर कोई ना कोई दवा बेचने की बात होने लगती हैं।

    कोई भी बिमारी के कारण और उसको सही करने की बात नहीं करता।  प्रयास तो दूर की बात है।

    हार्ट ब्लॉकेज का आयुर्वेदिक इलाज

    सुखायु आयुर्वेद पर हम लोग हार्ट की ब्लॉकेज का इलाज़ करने के लिए एक वैज्ञानिक प्रक्रिया को फॉलो करते हैं।  जिसमें सबसे पहले रोगी के दोषों का सम्पूर्ण अध्ययन किया जाता है।  इसके लिए नाड़ी परीक्षा की मदद ली जाती है।  एक  बार दोषों का निर्धारण हो जाए तब  रोग के कारण के अनुसार चिकत्सा की जाती है।

    नाड़ी परीक्षा के लिए हम लोग वैज्ञानिक व आधुनिक मशीनों का भी इस्तेमाल करते हैं जिससे की कहीं गलती की गुंजाईश ना रह जाए।

    हार्ट ब्लॉकेज का आयुर्वेदिक इलाज़

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